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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Innate Ideas

सहज प्रत्यय
बुद्धिवादी विचारकों के अनुसार, वे प्रत्यय जो जन्म से ही मनुष्य के मन में होते हैं, जिन्हें शिक्षा और अनुभव से प्राप्त करने की जरूरत नहीं होती, और सामान्यतः जो सभी मनुष्यों को प्राप्त होते हैं। ईश्वर, अमरत्व, पाप और पुण्य आदि ऐसे ही प्रत्यय हैं।

Innatism

सहजप्रत्ययवाद
ज्ञानमीमांसीय सिद्धांत जिसके अनुसार प्रत्यय मन के अंदर जन्म से ही अपने पूर्ण रूप में अथवा बीज-रूप में विद्यमान रहते हैं।

Inner Intension

आंतर अभिप्राय
मैकेन्जी के अनुसार किसी कार्य के सम्पादन के लिये कर्त्ता का अप्रकट या अनभिव्यक्त अभिप्राय / मनोरथ, जो उसके प्रकट या अभिव्यक्त मनोरथ से भिन्न हो सकता है।

Inner Sense

अंतःकरण, अन्तरिन्द्रिय
देखिए “internal sense”।

Inorganic Evolution

अजैव-विकास
जड़ पदार्थों की सरल से जटिल एवम् जटिलतर होने की नैसर्गिक प्रक्रिया।

Inseparable Accident

अवियोज्य आगंतुक गुण
वह आगंतुक गुण जो वर्ग के प्रत्येक व्यष्टि में पाया जाय अथवा व्यष्टि में सदैव विद्यमान रहे।
उदाहरण : कौवे का काला रंग, व्यक्ति-विशेष की जन्मतिथि।

Insolubilia

असमाधेय
विरोधाभासों (paradoxes) के लिए मध्ययुगीन दर्शन में प्रयुक्त नाम : इसके अंतर्गत ऐसे कथन आते हैं जैसे “यह कथन सत्य नहीं है”।

Instantial Indefinite

द्राष्टांतिक अनिश्चयवाचक
देखिए “definite indefinite”।

Instantial Proposition

द्राष्टांतिक प्रतिज्ञप्ति
अस्तित्व (existence) “(ईश्वर है)” और वर्तित्व (subsistence) “(3+4=7)” बताने वाली प्रतिज्ञप्तियों का सामूहिक नाम।

Instantiation

दृष्टांतीकरण
प्रतीकात्मक प्रतिज्ञप्ति में किसी व्यष्टि-चर के स्थान पर एक व्यष्टि-अचर को रख देना। देखिए “individual constant” तथा “individual variable”।

Instinctive Morality

सहज नैतिकता
पशुओं और मनुष्यों का वह व्यवहार जो नैतिकता के अनुरूप होता है, परंतु जिसमें विचार और संकल्प का अभाव होता है।

Instrumentalism

करणवाद
जान ड्यूई (John Dewey) का वह मत कि ज्ञान जीवन का पर्यावरण से सफलतापूर्वक समायोजन करने का एक साधन (करण) है।

Instrumental Theory

करण-सिद्धांत
सी. डी. ब्रॉड के अनुसार वह मत कि मन, शरीर से स्वतंत्र अस्तित्व रखता है, पर जब तक वह किसी शरीर से जुड़ा होता है तब तक शरीर ही उसके लिए ज्ञान और कर्म का साधन होता है।

Instrumental Value

साधन-मूल्य
वह वस्तु जो साधन के रूप में मूल्यवान् हो या जिसका मूल्य उससे निकलने वाले वास्तविक या संभावित परिणामों पर आश्रित हो।

Intellectualistic Determinism

बुद्धिपरक नियतत्ववाद
विन्डेलबैंड के अनुसार वह मत कि बुद्धि न केवल शुभ का सामान्य रूप से बोध कराती है अपितु यह भी विचार करती है कि व्यक्ति के लिए विशेष रूप से शुभ क्या है और इस प्रकार उसके संकल्प को भी प्रभावित करती है।

Intellectual Virtue

बौद्धिक सद्गुण
बुद्धि के विकास से संबंधित सद्गुण।

Intellectus Agens

सक्रिय बुद्धि
टॉमस एक्विनस के अनुसार, आत्मा की एक विशेष शक्ति जो संवेदन से प्राप्त वस्तु की नकल से अपनी प्रकृति से सामंजस्य रखने वाले तत्वों को लेकर वस्तु की नकल यानी “संवेदी प्रतीरूप” (sensible species) को ‘बुद्धिपरक प्रतिरूप’ (“intelligible species”) में बदल देती है।

Intellectus Archetypus

बुद्धि-आदिरूप
कांट के अनुसार, वह बुद्धि जिस पर या जिसके प्रत्ययों पर संवेदनों या संवेदनों में दी हुई वस्तुओं का स्वरूप आश्रित होता है।

Intellectus Ectypus

संवेदनाश्रित बुद्धि
कांट के अनुसार, वह बुद्धि जो अपने प्रत्ययों या प्रक्रियाओं के लिए सामग्री इंद्रियानुभव या संवेदनों से प्राप्त करती है।

Intelligible

बुद्धिगम्य
सामान्य अर्थ में, वह जो समझ में आ सके, विशेष रूप से वह जो केवल बुद्धि से ही जाना जा सकता हो, इंद्रियों से नहीं।

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