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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Naturism

1. प्रकृति-पूजा : प्राकृतिक शक्तियों के प्रकोप के भय से उनकी पूजा।
2. प्रकृतिदेववाद : वह सिद्धांत कि आदिम धर्म प्रकृति या प्राकृतिक शक्तियों को देवता मानकर चलने वाला और उनकी उपासना का ही एक रूप था।

Necessary Condition

अनिवार्य उपाधि (कारक)
कारण की व्याख्या में वह घटक या शर्त जिसकी उपस्थिति घटना के लिये आवश्यक है अर्थात् वह कारक जिसकी अनुपस्थिति में घटना/कार्य घटित न हो सके।

Necessary Proposition

अनिवार्य प्रतिज्ञप्ति, निश्चयात्मक प्रतिज्ञप्ति
पारम्परिक तर्कशास्त्र में विधि (निश्चयमात्र) के अनुसार दिये गये प्रकारों में से प्रतिज्ञप्ति का एक प्रकार। इस प्रकार की प्रतिज्ञप्ति में उद्देश्य और विधेय में ऐसा अनिवार्य संबंध होता है जो भूत, वर्तमान तथा भविष्य सभी कालों के लिये सत्य होता है और इसके विपरीत कभी सत्य नहीं हो सकता।
उदाहरणार्थ : त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग दो समकोणों के योग के बराबर होता है। 2 + 2 = 4 अवश्य होते हैं। इसका प्रारूप है S must be P अर्थात् S अवश्य ही P है।

Necessitarianism

अवश्यतावाद
देखिए “determinism”।

Necromancy

प्रेत विद्या
प्रेतों को वश में करने की विद्या।

Negationism

निषेधवाद
वह सिद्धांत जो सभी बातों का निषेध करता है।

Negative Condition

अभाव-उपाधि
मिल के अनुसार, कार्योत्पत्ति को रोकनेवाले कारक का अभाव, जैसे, फिसलकर गिरने वाले आदमी के प्रसंग में अवलंब का अभाव।

Negative Definition

निषेधात्मक परिभाषा
परिभाष्य पद की परिभाषा इस प्रकार से दी जाये कि उससे यह पता चलने के बजाये कि ‘वह क्या है?’, यह पता चले कि ‘वह क्या नहीं है?’, निषेधात्मक परिभाषा कहलाती है। अभावात्मक पदों (यथा-अस्वेत, संदेह आदि) को छोड़ कर जब भावात्मक पदों (श्वेत आदि) की निषेधात्मक शब्दों में परिभाषा दी जाती है, तब यह दोषपूर्ण हो जाती है। जैसे :’ गर्मी सर्दी नहीं है; दिन रात का अभाव है।

Negative Method Of Agreement

अन्वय की निषेधात्मक पद्धति
इस पद्धति में कारण स्वरूप घटना के किसी कारक या घटक की अनुपस्थिति में कार्य स्वरूप घटना में कोई कारक या घटक अनेक अवस्थाओं में अनुपस्थित रहता है।
उदाहरणार्थ : जब-जब ‘क’ अनुपस्थित रहता है तब-तब ‘प’ भी अनुपस्थित रहता है। इस दृष्टांत में ‘क’ और ‘प’ में निषेधात्मक अन्वय है।

Negative Proposition

निषेधात्मक प्रतिज्ञप्ति, अभावात्मक प्रतिज्ञप्ति
गुण के दृष्टिकोण से प्रतिज्ञप्ति का एक प्रकार। ऐसी प्रतिज्ञप्तियाँ जिसमें उद्देश्य पद विधेय पद को अस्वीकार करता है अथवा जिसमें उद्देश्य पद के लिये विधेय पद का निषेध किया जाता है, उसे निषेधात्मक अथवा अभावात्मक प्रतिज्ञप्ति कहते हैं। जैसे : कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है। कुछ वैज्ञानिक दार्शनिक नहीं हैं। यह दो प्रकार की होती है। पूर्णव्यापी निषेधात्मक और अंशव्यापी निषेधात्मक। निरूपाधिक प्रतिज्ञप्तियों के मानक आकार के अन्तर्गत E (ई) एवं O (ओ) क्रमशः पूर्णव्यापी निषेधात्मक एवं अंशव्यापी निषेधात्मक प्रतिज्ञप्तियाँ हैं।

Negative Term

अभावात्मक पद
वह शब्द या शब्द-समूह जो किसी गुण या वस्तु के भाव को प्रकट करे, जैसे “बुद्धिहीन”, “अमानव”, “अश्वेत” इत्यादि।

Negative Value

नास्ति-मूल्य, अभावात्मक मूल्य
भावात्मक मूल्यों का निषेध करने वाले मूल्य यथा अशुभ, असत्य इत्यादि।

Negativism

निषेधवाद
सत्य की प्राप्ति में संशय करने वाला अथवा सत्य की प्राप्ति को असंभव मानने वाला, या सत्ता का, विशेषतः दृश्य जगत् का, निषेध करने वाला सिद्धांत।

Neglective Fiction

अपाकर्षी कल्पितार्थ
हान्स फाइइंगर (Hans Vaihinger) के अनुसार, वह कल्पितार्थ यानी अवास्तविक परन्तु व्यवहारोपयोगी संप्रत्यय जिसमें विचार की सरलता के लिए जटिल तथ्यों में से कुछ बातों को निकालकर आवश्यक तत्त्वों को रख लिया जाता है।

Neo-Criticism

नव्य समालोचनावाद, नव्य समीक्षावाद
रिनुविए (Renouvier) द्वारा प्रतिपादित मत, जिसके अन्तर्गत उन्होनें कांट की समीक्षात्मक पद्धति को स्वीकार करते हुए भी कांट द्वारा प्राप्त निष्कर्षों की आलोचना की।

Neo-Idealism

नव्य-प्रत्ययवाद
हेगेल के मूलभूत सिद्धांतों से प्रभावित किन्तु स्वतंत्र रूप से विकसित प्रत्ययवाद जिसका प्रतिपादन इटली के प्रसिद्ध दार्शनिक क्रोचे (Croce) एवं जेन्टाइल (Gentile) ने किया है। इन्होंने हेगेल के सर्वबुद्धिवाद को अस्वीकृत करते हुए दर्शन की ऐतिहासिक व्याख्या की और कहा कि यद्यपि निरपेक्ष सत् एक है किन्तु वह कोई स्थिर सत्ता नहीं है, अपितु ऐसी प्रगतिशील सत्ता है जो स्वरूपतः परिवर्तनशील तथा निरन्तर विकसनशील है।

Neo-Intuitionism

नव्य-अन्तःप्रज्ञावाद
रॉस (Ross), प्रिचर्ड (Prichard), कैरिट (Carritt) आदि समसामयिक दार्शनिकों द्वारा प्रतिपादित मत। इनके अनुसार उचित एवं अनुचित का निर्णय कर्त्ता के द्वारा परिस्थितियों के चयन में होता है किन्तु इसका आधार साधारण बुद्धि न होकर व्यक्ति की अन्तःप्रज्ञा होती है, अतः यह परिणामनिरपेक्ष होता है, परिणामसापेक्ष नहीं।

Neo-Kantianism

नव्य कांटवाद
जर्मनी में 1870 और 1920 के बीच में होने वाले अनेक दार्शनिक आंदोलनों के लिए प्रयुक्त पद। इन आंदोलनों ने कांट की भावना, समीक्षात्मक विधि और कृतित्व से प्रेरणा ली। कांट की कृति के विभिन्न पक्षों पर बल देने पर मतभेद रखते हुए वे सभी परिकल्पनात्मक तत्वमीमांसा के विरोधी थे और कांट के अनुभववाद और बुद्धि के समन्वय के मन्तव्य की ओर प्रवृत हुए।

Neology

नव्य-प्रयोग
सामान्यतः नए शब्द का प्रयोग अथवा पुराने शब्द का परंपरा से भिन्न किसी नए अर्थ में प्रयोग।

Neo-Platonism

नव्य-प्लेटोवाद
ऐमोनियस सेकस के शिष्य प्लाटिनस द्वारा स्थापित मत, जो प्लेटो के प्रत्ययवाद का पुनरूद्धार था और जिसमें प्लेटो के विचारों और पूर्वी रहस्यवाद का मिश्रण था।

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