भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z

Please click here to view the introductory pages of the dictionary
शब्दकोश के परिचयात्मक पृष्ठों को देखने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें।

Neo-Thomism

नव्य-टॉमसवाद
संत टॉमस एक्विनस के विचारों का परिष्कृत रूप। इसके अनुसार ‘दर्शन ईश्वरमीमांसा का सेवक है’। यह समसामायिक वस्तुगत प्रत्ययवाद का धर्मशास्त्रीय रूप है जो ‘विशुद्ध स्वत्व’ को उच्चतम यथार्थ मानता है जिसे आत्मिक, दिव्य मूल-तत्व समझा जाता है। इस वाद को मानने वाले रूप तथा भूतद्रव्य, अन्तर्निहित क्षमता तथा संक्रिया (संभावना और यथार्थ) के मिथ्याकृत अरस्तूवादी प्रवर्गों एवं साथ ही अस्तित्व तथा सार के प्रवर्गों का धार्मिक जड़सूत्रों के प्रमाण के रूप में व्यापक उपयोग करते हैं। वे परिकल्पनात्मक विन्यासों के परिणामस्वरूप ईश्वर को स्वत्व का मूल कारण तथा समस्त दार्शनिक प्रवर्गों का मूल आधार मानते हैं।

Nescience

अविद्या, अज्ञान
विशेष रूप से, ईश्वर, आत्मा और पुद्गल के अज्ञान की अवस्था; परमार्थ-तत्व के ज्ञान का अभाव।

Neuter Proposition

अनुभय प्रतिज्ञप्ति, तटस्थ प्रतिज्ञप्ति
वह प्रतिज्ञप्ति जो न सत्य हो और न असत्य, जैसे “आज से पाँच वर्ष पश्चात् तीसरा महायुद्ध होगा”। इस तरह की प्रतिज्ञप्तियों की सत्यता-असत्यता को अरस्तू ने संदिग्ध माना था और मध्ययुगीन तर्कशास्त्रियों ने इन्हें अनुभय माना।

Neutral Monism

तटस्थ एकतत्त्ववाद, निर्विशेष एकतत्त्ववाद
(1) वह मत कि परम सत्ता न मानसिक है, न भौतिक और जो एक है, और दोनों अर्थात् मानसिक और भौतिक से उभय है। मनस् और जड़ उस एक सत्ता के दो गुण मात्र हैं और जो स्वतंत्र एवं निरपेक्ष नहीं है। स्पिनोजा इसी मत का प्रतिपादन करता है।
(2) रसल ने अपने दर्शन में इन्द्रिय-प्रदत्त के आधार पर भौतिक एवं मानसिक पदार्थों को समझाते हुए, तटस्थ एकतत्त्ववाद की स्थापना की है। उनके अनुसार एक विशेष प्रकार के इन्द्रिय-प्रदत्तों की तार्किक संरचना (logical construction out of sense-data), मानसिक पदार्थ एवं एक विशेष प्रकार की इन्द्रिय पदार्थों की तार्किक संरचना भौतिक पदार्थ कहलाती है। भौतिक एवं मानसिक तत्त्वों के विश्लेषण में रसल ने मात्र ‘इन्द्रिय-प्रदत्त’ को स्वीकार किया है। अतः इस अर्थ में उनका विचार’ तटस्थ एकतत्त्ववाद’ कहा जाता है। इस मत को विलियम जेम्स ने भी अपने निबंध ‘क्या चेतना का अस्तित्त्व है?’ में स्वीकार किया है।

Neutral Stuff

तटस्थ वस्तु, उभयेतर वस्तु
अर्नस्टमाक, एबेनेरियस आदि दार्शनिकों के अनुसार, ऐसी वस्तु जो न मानसिक है और न भौतिक, किन्तु जो दोनों के मूल में है।

Neutrum

तटस्थ वस्तु, अनुभय वस्तु
देखिए “neutral stuff”।

New Realism

नव-यथार्थवाद
वह मत जिसके अनुसार ज्ञान का विषय ज्ञाता से स्वतंत्र है और इनके बीच बाह्य संबंध है। साथ ही वस्तुएँ ठीक वैसी ही हैं, जैसी प्रतीत होती हैं और जैसी प्रतीत होती हैं, ठीक वैसी ही हैं जिसका ज्ञान साक्षात होता है, इसके लिये किसी माध्यम की अपेक्षा नहीं है। इसकी दो शाखाएँ हैं : एक का विकास जी. ई. मूर के नेतृत्व में इंग्लेंड में हुआ और दूसरी का अमेरिका में, होल्ट, मार्विन, पेरी, पिटकिन आदि के द्वारा।

Nihil Est In Intellectu Quod Non Prius

नास्ति संवेदन यत्तत्, बुद्धावपि न वर्तते (संवेदना के अभाव में बुद्धि का न होना)
लैटिन भाषा का एक सूत्र जिसका अर्थ है : “कोई भी ऐसी बात बुद्धि में नहीं होती जो पहले संवेदन में न रह चुकी हो।” अर्थात् उच्चतर चिंतन-मनन की सारी सामग्री ज्ञानेन्द्रियों के व्यापार से प्राप्त होती है। इस सिद्धांत के मानने वालों में अरस्तू, संत टॉमस और लॉक प्रमुख थे।

Nihil Ex Nihilo

नासतः किंचित् (असत् से सत्)
“असत् से कुछ उत्पन्न नहीं होता”। यह सूत्र पर्याप्त-हेतु सिद्धांत का निषेधात्मक रूप है।

Nihilism

शून्यवाद
इस मत के अनुसार सत्ता चतुष्ट कोटि से परे है अर्थात् (i) न वह सत् है, (ii) न असत् है, (iii) न उभय है, (iv) न उभय से परे है, अर्थात् अनिर्वचनीय है। इस मत का प्रमुख उदाहरण नागार्जुन के बौद्ध दर्शन में द्रष्टव्य है।

Nominal Definition

नाम-विषयक परिभाषा
एक मत के अनुसार, वह परिभाषा जो वस्तु की नहीं बल्कि शब्द या नाम की होती है। इसमें कुछ तर्कशास्त्रियों को यह आपत्ति है कि परिभाषा सदैव नाम या शब्द की ही होती है, वस्तु की कदापि नहीं। अतः कोपी (Copi) इत्यादि कुछ तर्कशास्त्री इस पद को “स्वनिर्मित परिभाषा” का पर्याय मानते हैं।
देखिए “stipulative definition”।

Nominal Essence

शाब्दिक सार
जॉन लॉक के अनुसार, मन में विद्यमान कोई जटिल प्रत्यय जिसे कोई नाम दे दिया गया हो और जो उस नाम की परिभाषा का आधार बनता है। इसका “वास्तविक सार” (“real essence”) से भेद किया गया है।

Nominalism

नाममात्रवाद
वह सिद्धांत कि सामान्य कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसका कोई अस्तित्व हो जैसे : “मनुष्य” इत्यादि। ये किसी ऐसी वस्तु के अस्तित्व के सूचक नहीं होते जो उन व्यष्टियों में समान हो; व्यष्टियों में समान केवल नाम होता है।

Nomological Proposition

नियम-प्रतिज्ञप्ति
वह प्रतिज्ञप्ति जो प्रकृति के किसी नियम को व्यक्त करे, जैसे : “समुद्र की सतह पर पानी 32 डिग्री फा. पर जमकर बर्फ बन जाता है,” “प्रत्येक भौतिक पिंड प्रत्येक अन्य भौतिक पिण्ड को उपनी ओर खींचने की शक्ति रखता है” इत्यादि।

Non-Centre Theory

अ-केन्द्र-सिद्धांत
सी. डी. ब्रॉड के अनुसार, मानसिक एकता का कारण किसी एक केन्द्र भूत सत्ता को न मानकर एक काल में होने वाली मानसिक घटनाओं का सीधे पारस्परिक संबंधों से जुड़े होने को मानने-वाला सिद्धांत।

Non-Cogitative Substance

अचिंतक द्रव्य
लॉक के अनुसार, ऐसा द्रव्य जिसमें चिंतन की शक्ति न हो।

Non-Cognitivist Theory

निःसंज्ञानवादी सिद्धांत
स्वीडन, इंग्लेण्ड और अमेरिका में विकसित अधि-नीतिशास्त्र का एक सिद्धांत जिसके अनुसार नैतिक निर्णय नैतिक तथ्यों को स्वीकार नहीं करता है। यह सिद्धांत यह भी मानता है कि नैतिक अन्तर्ज्ञान के द्वारा कुछ भी नहीं जाना जा सकता है।

Non-Collective Term

असमूह-पद
पारंपरिक तर्कशास्त्र में, वह पद जो किसी समूह के लिए प्रयुक्त न हो, जैसे ‘मनुष्य’।

Non-Connotative Term

अ-वस्तुगुणार्थक पद
जॉन स्टुअर्ट मिल के अनुसार, वह पद जिसका या तो केवल वस्त्वर्थ हो या केवल गुणार्थ, न कि दोनों, जैसे “जेम्स” (केवल वस्त्वर्थ) या “श्वेतत्व” (केवल गुणार्थ)।

Non-Dualism

अद्वैतवाद
भारतीय दर्शन के “अद्वैतवाद” का अंग्रेजी पर्याय। अद्वैतवाद में ब्रह्म को एकमात्र सत्य माना गया है और जगत् को मिथ्या। नानात्व माया के कारण प्रतीत होता है और इसलिए पारमार्थिक दृष्टि से असत् है। सत्य केवल ब्रह्म है, पर उसे ‘एक’ न कहकर अद्वैत कहा गया है : ‘एक’ इसलिए नहीं कि ब्रह्म निर्विशेष है; ‘एक’ कहना उसे सविशेष बना देने के समान है, अतः उसके लिए अद्वैत इत्यादि निषेधात्मक शब्दों का प्रयोग अधिक समीचीन है।

Search Dictionaries

Loading Results

Follow Us :   
  Download Bharatavani App
  Bharatavani Windows App